Wednesday, June 24, 2026
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छत्रपति शिवाजी के 350वें राज्याभिषेक की वर्षगांठ पर पीएम मोदी ने कहा, “साहस और वीरता का प्रतीक।”

छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक की 350वीं वर्षगांठ पर पीएम मोदी ने आज कहा कि एक भारत श्रेष्ठ भारत के विजन में छत्रपति शिवाजी महाराज के विचारों का ही प्रतिबिंब देखा जा सकता है। उन्होंने शिवाजी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि आज के दिन से हम प्रेरणा लेते हुए नए भारत की ओर तेजी से बढ़ेंगे।

नई चेतना, नई ऊर्जा लेकर आया आज का दिन

छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक दिवस के मौके पर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक समारोह को संबोधित किया। पीएम ने कहा कि ये मौका नई चेतना, नई ऊर्जा लेकर आया है।

उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक उस कालखंड का एक अद्भुत और विशिष्ट अध्याय है और राष्ट्र कल्याण और लोक कल्याण उनकी शासन व्यवस्था के मूल तत्व रहे हैं।

पीएम ने कहा कि शिवाजी ने हमेश भारत की एकता और अखंडता को सर्वोपरि रखा। सैंकड़ों वर्षों की गुलामी ने देशवासियों से उनका आत्मविश्वास छीन लिया था, ऐसे समय में लोगों में आत्मविश्वास जगाना एक कठिन कार्य था। उस दौर में छत्रपति शिवाजी महाराज ने ना केवल आक्रमणकारियों का मुकाबला किया बल्कि जन मानस में ये विश्वास भी कायम किया कि स्वयं का राज संभव है।

महाराष्ट्र सरकार की ओर से आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री के एक पहले से रिकॉर्ड किए गए संदेश को प्रसारित किया गया। मोदी ने कहा कि इतने वर्ष के बाद भी छत्रपति शिवाजी द्वारा स्थापित किए गए मूल्य हमें आगे बढ़ने का मार्ग दिखा रहे हैं। पीएम ने कहा कि इन्हीं मूल्यों के आधार पर हमने अमृत काल के 25 वर्षों की यात्रा पूरी करनी है।

पीएम बोले- इन मुद्दों पर यात्रा होगी तय

  • शिवाजी महाराज के सपनों का भारत बनाने की यात्रा।
  • स्वराज, सुशासन और आत्मनिर्भरता की यात्रा।
  • विकसित भारत बनाने की यात्रा।

उनके कार्य, शासन प्रणाली और नीतियां आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। उन्होंने भारत के सामर्थ्य को पहचान कर जिस तरह से नौसेना का विस्तार किया वो आज भी हमें प्रेरणा देता है।

शिवाजी महाराज की राज-मुद्रा का जिक्र

पीएम ने कहा कि हमारी सरकार का सौभाग्य है कि छत्रपति शिवाजी महाराज से प्रेरणा लेकर पिछले साल भारत ने गुलामी के एक निशान से नौसेना को मुक्ति दे दी। उन्होंने कहा कि हमने अंग्रेजी शासन की पहचान को हटाकर शिवाजी महाराज की राज-मुद्रा को जगह दी है।

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