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अमेरिका में कोरोना का कहर जारी, एक्सपर्ट से जानें नए वेरिएंट्स के बारे में सबकुछ

दुनियाभर में तबाही मचाने वाले कोरोना वायरस के मामले अभी भी सामने आ रहे हैं। बीते कुछ दिनों में इस वायरस के एक ही नहीं, बल्कि तीन नए स्ट्रेन सामने आ चुके हैं। ऐसे में सभी के मन में एक ही सवाल उठ रहा है कि नए वेरिएंट के साथ क्या संयुक्त राज्य अमेरिका में कोविड-19 एक नई लहर के रूप में वापस आ रहा है? हाल ही में सामने आए कोरोना के तीन नए स्ट्रेन EG.5, एफएल.1.5.1 और बीए.2.86 के मामले तेजी से फैल रहे हैं।

ऐसे में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच लोग एक बार फिर उस वायरस के बारे में सावधान हो गए हैं, जिसने एक महामारी के रूप में दुनिया भर में हजारों लोगों की जान ली थी। कोरोना का EG.5 वेरिएंट, जिसे एरिस के नाम से भी जाना जा रहा है, वर्तमान में अमेरिका में इसके मामले सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं। 18 अगस्त को, सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (सीडीसी) ने अनुमान लगाया कि 20.6% नए संक्रमण के मामलों के लिए ईजी.5 जिम्मेदार था।

कितने खतरनाक नए वेरिएंट्स

वहीं, FL.1.5.1 वेरिएंट अमेरिका में सबसे प्रमुख स्ट्रेन के रूप में दूसरे स्थान पर है। सीडीसी के अनुसार, यह देश में 13.3% नए संक्रमणों के लिए जिम्मेदार है। विशेष रूप से, EG.5 और FL.1.5.1 दोनों XBB वेरिएंट के सबवेरिएंट हैं। F456L नामक म्यूटेशन के कारण, ये अन्य वायरस वेरिएंट की तुलना में ज्यादा फैलते हैं।

बात करें BA.2.86 वेरिएंट की, तो वर्तमान में वह छोटे पैमाने पर नए संक्रमण का कारण बन रहा है। हालांकि, बड़ी संख्या में म्यूटेशन के कारण यह अत्यधिक जोखिम भरा वेरिएंट बन सकता है। ऐसे में EG.5 और BA.2.86 के बीच अंतर जानने के लिए हमने नोएडा के मेट्रो हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसीन के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. सैबल चक्रवर्ती से बात की।

एरिस और BA.2.86 में अंतर

डॉक्टर ने बताया कि साल 2019 के बाद से COVID-19 में कई म्यूटेशन हुए हैं। एरिस और BA.2.86, दोनों XBB के सबवेरिएंट हैं। ये दोनों वैरिएंट वर्तमान में WHO की निगरानी में हैं और संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, चीन और अन्य देशों में मामलों में बढ़ रहे कोरोना के मामलों के लिए जिम्मेदार हैं। यह आमतौर पर बूंदों के जरिए फैलता है। दोनों ही वेरिएंट्स अलग-अलग तरह के व्यवहार करते है, क्योंकि उनमें अलग-अलग जेनेटिक सीक्वेंस परिवर्तन होते हैं। दुनिया भर में एरिस के मामलों में संक्रमण की दर ज्यादा है।

दोनों वेरिएंट के लक्षण

बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, थकान, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, स्वाद और गंध की हानि और गले में खराश ऐसे लक्षण हैं, जो एरिस संक्रमण में दिखने को मिल रहे हैं। वहीं, BA.2.86 में रेशज, कंजंक्टिवाइटिस और दस्त सहित कुछ नए अतिरिक्त लक्षण शामिल हैं।

नए वेरिएंट से कैसे करें बचाव

डॉक्टर कहते हैं कि कोरोना के वेरिएंट से बचने के लिए सबसे कारगर तरीका वैक्सीनेशन है। कोरोना के नए वेरिएंट्स के खिलाफ बचाव के लिए कोविड वैक्सीन को अपग्रेड किया जा रहा है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि जो शॉट हमने पहले लिए थे वे प्रभावी नहीं हैं, लेकिन वे कम प्रभावी हो सकते हैं। इसलिए अगर आखिरी खुराक के बाद एक साल से अधिक समय हो गया है, तो COVID-19 वैक्सीन का बूस्टर शॉट जरूर लें।

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