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दंगों से हुआ स्वागत, कोविड में बीता साल, ऐसा रहा केजरीवाल सरकार 3.0 का पहला साल

दिल्ली : बीते साल 16 फरवरी को लगातार तीसरी बार शपथ लेने वाले अरविंद केजरीवाल सरकार को आज एक साल पूरे हो गए। दिल्ली की 70 में से 63 सीटों पर जीत हासिल करके लगातार तीसरी बार सत्ता में काबिज होने वाले मुख्यमंत्री केजरीवाल के लिए बीता साल बेहद चुनौती भरा रहा। शपथ लेने के ठीक सातवें दिन दिल्ली में दंगों से उनका स्वागत हुआ। दंगे से राहत मिलती तब तक एक मार्च को कोविड-19 का पहला केस दिल्ली में दर्ज हुआ। उसके बाद पूरा साल कोविड के नाम रहा।

दंगा फिर कोविड से नहीं निकल पाई सरकार
नई सरकार को लेकर जश्न खत्म होता उससे पहले ही केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के उत्तर-पूर्वी जिले में दंगे का भयावह रूप देखा। सरकार में होने के साथ दंगे में आप के एक पार्षद का नाम आने के बाद पार्टी को उसका नुकसान उठाना पड़ा। दंगे थमते हालात सामान्य होते उससे पहले ही एक मार्च को कोरोना का पहला केस मयूर विहार में सामने आया। उसके बाद कोरोना का सिलसिला शुरू हुआ वह अब तक जारी है।

कोविड मॉडल की हुई तारीफ
मार्च में कोविड का पहला केस आने के बाद दिल्ली में कोरोना की तीन लहर आई है। सरकार के सामने यह एक चुनौती थी। सरकार ने होम आइसोलेशन, प्लाज्मा थैरेपी, प्लाज्मा बैंक जैसी योजनाएं शुरू करके दिल्ली में कोविड रोकने और उसके इलाज को लेकर बड़ी सफलता हासिल की। उसका असर यह रहा कि कई दूसरे राज्यों ने उसे अपनाया। विदेशों में भी उसकी चर्चा हुई। सरकार के आंकड़े बताते हैं कि कोरोना काल में 3.12 लाख से अधिक लोग होम आइसोलेशन में ठीक हुए। 4929 लोग प्लाज्मा थैरेपी से ठीक हुए।

लॉकडाउन के दौरान दी आर्थिक मदद
कोविड काल में दिल्ली की आर्थिक व्यवस्था गड़बड़ा गई। दिल्ली सरकार का राजस्व 80 फीसदी से नीचे आ गया। इसके बाद भी सरकार ने लोगों को मिलने वाली आर्थिक मदद नहीं रोकी। बिजली पानी पर छूट जारी रखी गई। इसमें 73.54 फीसदी उपभोक्ताओं को बिजली का जीरो बिल मिला। जलबोर्ड के 13.66 लाख लोगों को पानी का शून्य बिल मिला। लॉकडाउन के दौरान 1.56 लाख ऑटो, टैक्सी चालकों को पांच हजार रुपये वन टाइम आर्थिक मदद दी गई। 43 हजार 945 निर्माण मजदूरों को 10 हजार रुपये की आर्थिक मदद लॉकडाउन के दौरान दी गई। इसके अलावा 10 लाख से अधिक लोगों को लॉकडाउन के दौरान खाना खिलाया गया। रुकने की व्यवस्था भी की गई।

शिक्षा
लॉकडाउन के बाद स्कूल बंद रहे। शिक्षा के क्षेत्र में बहुत काम तो नहीं हुआ पर सरकारी स्कूल के बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा देने की व्यवस्था की गई। इस दौरान स्कूलों में रुके विकास कार्य किए गए।

स्वास्थ्य
स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने का मौका मिला। वेंटिलेटर की संख्या बढ़ाई गई। बुराड़ी में एक बड़ा अस्पताल दिल्लीवालों को मिला।

परिवहन
परिवहन के क्षेत्र में दस साल बाद डीटीसी के बेड़े में एक हजार वातानुकूलित सीएनजी बस की खरीद का आदेश जारी किया गया है। हालांकि, ई-बस को लाने की प्रक्रिया अभी जारी है।
– 1000 डीटीसी बस के खरीद का आदेश दिया गया।
– 6000 ई-वाहन को अगस्त से अब तक सरकार ने सब्सिडी दिया।
– 10 सड़कों पर री डिजाइनिंग पर काम शुरू हुआ।

योजनाएं जो परवान चढ़ी

1. ई-वाहन नीति को मंजूरी
दिल्ली सरकार ने लॉकडाउन में प्रदूषण मुक्त दिल्ली की दिशा में काम करते हुए अगस्त 2020 में ई-वाहन नीति की अधिसूचना जारी की। तब से अब तक 6000 से अधिक ई-वाहन पंजीकृत हुए हैं। चार पहिया पर 1.50 लाख तक और दुपहिया पर 15 हजार रुपये तक की सब्सिडी दी गई।

2. डीटीसी बेड़े में एक हजार बसों का ऑर्डर
दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) 2011 से बसें लाने की कोशिश चल रही थी। मगर यह दस साल बाद दिसंबर 2020 में पूरा हुआ। डीटीसी के बेड़े में दस साल बाद 1000 वातानुकूलित बस खरीद के लिए आदेश जारी किए गए। अभी डीटीसी में 3738 बसें हैं, जबकि यह 5500 होनी चाहिए।

3. राशन की होम डिलिवरी
कोविड में भी सरकार ने राशन की होम डिलिवरी योजना पर काम शुरू कर दिया। सरकार मार्च तक इसे शुरू करने की बात कह रही है। इस दिशा में निविदा जारी कर दी गई है। यही नहीं एक देश एक राशन कार्ड के तहत दिल्ली की दुकानों पर फिर से ई-पॉज मशीन से राशन देने का काम शुरू कर दिया गया है।

4. उधोग नीति में बदलाव
दिल्ली की उद्योग नीति में बदलाव करते हुए सरकार ने एक बड़े वर्ग को राहत दी, जिससे दिल्ली में नौकरियों के अवसर भी पैदा होंगे। अब दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्र में भी सेवा क्षेत्र वाली कंपनियों को ऑफिस खोलने की मंजूरी दी गई है। पहले सिर्फ फैक्ट्री लगाने की अनुमति थी। अब आईटी सेक्टर, सीए ऑफिस समेत अन्य सेवा क्षेत्र के लोग भी ऑफिस खोल सकते हैं। अभी यह लोग एनसीआर में जाते थे।

5. सड़कों की री डिजाइनिंग पर काम
दिल्ली में सड़कों को री डिजाइन का काम शुरू कर दिया गया है। कुल दस सड़कों को चिन्हित किया गया है जिन्हें यूरोपीय सड़कों की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। इसमें कुछ सड़कों पर काम भी शुरू हो गया है।

चुनावी घोषणा जो परवान नहीं चढ़ पाई

1. मोहल्ला सुरक्षा योजना
दिल्ली में स्ट्रीट क्राइम रोकने के लिए सरकार ने बीते साल सत्ता में आते ही बजट में मुख्यमंत्री मोहल्ला सुरक्षा योजना की घोषणा की थी। इसके तहत कॉलोनियों में सिविल डिफेंसकर्मियों की तैनाती की जानी थी। इसके लिए दस करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया था। मगर नवंबर तक के आंकड़े बताते हैं कि इसपर एक भी रुपया खर्च नहीं हो पाया।

2. ई-बस नहीं उतर पाई
दिल्ली सरकार तीन वर्षों से सड़कों पर ई-बस उतारने की योजना पर काम कर रही है। दो बार इसे लेकर निजी कंपनियों के साथ ट्रायल भी कर चुकी है। सरकार में आने के बाद घोषणा पत्र में भी इसका जिक्र था। मगर बीते एक साल में एक भी ई-बस सड़क पर नहीं आ पाई। निविदा से आगे सरकार नहीं बढ़ पाई है।

3. सीसीटीवी कैमरा लगाने का काम अटका
दिल्ली में सीसीटीवी कैमरा लगाना सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक थी। सरकार दूसरे चरण में भी 1.40 लाख सीसीटीवी कैमरा लगाना चाहती थी। मगर कोविड और गड़बड़ाई अर्थव्यवस्था के चलते फिलहाल यह योजना अटक गई है।

4. जहां झुग्गी वहीं मकान
सरकार ने गांरटी कार्ड में जहां झुग्गी वहीं मकान की योजना का वादा किया था। सरकार का दावा है कि कई हजार मकान बनकर तैयार हैं। मगर उन मकानों को गरीबों तक पहुंचाने में अभी सफलता नहीं मिल पाई है। सरकार इसके लिए कोविड काल को ही जिम्मेदार बताती है।

5. 24 घंटे पानी योजना
सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना हर घर नल और 24 घंटे पानी की योजना पर सरकार आगे नहीं बढ़ पाई है। अब भी यह योजना कागजों पर ही आगे बढ़ रही है। सरकार का इसका कुछ इलाकों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू करना है।

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