Uttarakhand

देवीधुरा में 8 मिनट तक चली ऐतिहासिक बग्वाल, फलों-फूलों की बरसात के बीच गूंजे मां वाराही के जयकारे

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मां वाराही के दर्शन कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की, देवीधुरा को नगर पंचायत बनाने की घोषणा

चम्पावत। विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां वाराही धाम देवीधुरा में रक्षाबंधन के पावन अवसर पर शुक्रवार को ऐतिहासिक बग्वाल मेले का भव्य आयोजन हुआ। सदियों पुरानी इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवीधुरा पहुंचे। चार खाम और सात थोक के बीच खेली गई बग्वाल के दौरान इस बार पाषाण युद्ध में फल और फूलों का प्रयोग किया गया।

बग्वाल दोपहर 1:48 बजे शुरू हुई और 1:55 बजे समाप्त हुई। करीब आठ मिनट तक चले इस ऐतिहासिक आयोजन के दौरान पूरा बग्वाल मैदान मां वाराही के जयकारों से गूंजता रहा। पारंपरिक ढालों के साथ मैदान में उतरे बग्वालियों ने सदियों पुरानी परंपरा को जीवंत किया।

मुख्यमंत्री धामी ने मां वाराही के किए दर्शन

बग्वाल मेले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हेलीकॉप्टर से देवीधुरा पहुंचे। हेलीपैड पर कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक रेखा यादव सहित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान पारंपरिक छोलिया नृत्य की प्रस्तुति भी दी गई।

मुख्यमंत्री ने शक्तिपीठ मां वाराही देवी की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मां वाराही की कृपा सभी पर बनी रहे।

‘विकास भी और विरासत भी’ पर जोर

मुख्यमंत्री ने देवीधुरा की ऐतिहासिक बग्वाल को उत्तराखंड की आस्था, लोक-संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता का जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक विकास के साथ प्रदेश की सांस्कृतिक जड़ों, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि विकास को केवल सड़क, भवन और बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

मुख्यमंत्री के अनुसार मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत कुमाऊं क्षेत्र के प्रमुख पौराणिक और धार्मिक स्थलों का विकास एवं सौंदर्यीकरण किया जा रहा है।

देवीधुरा में करोड़ों रुपये के विकास कार्य

मुख्यमंत्री ने बताया कि देवीधुरा मंदिर परिसर में 4.27 करोड़ रुपये की लागत से गढ़वाल खाम भवन तथा 4.57 करोड़ रुपये की लागत से रणकोची मंदिर के पुनर्निर्माण कार्य प्रगति पर हैं।

इसके अलावा घटोत्कच मंदिर का सौंदर्यीकरण, घटकु हिडिंबा मंदिर का निर्माण, सप्तेश्वर महादेव मंदिर में स्नानघाट और लधौनधुरा मेला स्थल के सौंदर्यीकरण जैसे कार्य पूरे किए जा चुके हैं।

घटोत्कच से झालिमाली मंदिर मार्ग के डामरीकरण पर 1.95 करोड़ रुपये, विभिन्न मंदिरों के सौंदर्यीकरण पर 4.70 करोड़ रुपये तथा पूर्णागिरि मार्ग पर 5 करोड़ रुपये की स्ट्रीट लाइट परियोजना पर भी कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में धार्मिक अवस्थापना और सौंदर्यीकरण के तहत 68.58 करोड़ रुपये की लागत से 397 कार्य किए गए हैं।

देवीधुरा बनेगा नगर पंचायत क्षेत्र

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देवीधुरा को नगर पंचायत क्षेत्र बनाने की बात कही। उन्होंने देवीधुरा में 9.80 करोड़ रुपये की लागत से मल्टी लेवल पार्किंग का निर्माण शीघ्र कराने की भी घोषणा की।

उन्होंने कहा कि बग्वाल मेले को ‘राजकीय मेला’ घोषित किया गया है, जिससे मेले की गरिमा बढ़ने के साथ व्यवस्थाओं को भी और अधिक मजबूत किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक पर्यटन का उद्देश्य स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देना और रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना है। उन्होंने युवाओं से अपनी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया।

चार खाम-सात थोक के बीच खेली गई बग्वाल

मां वाराही धाम में प्रधान पुजारी की विधिवत पूजा-अर्चना के बाद बग्वाल की शुरुआत हुई। इसके बाद चारों खाम—वालिक, चम्याल, गहड़वाल और लमगड़िया—के बग्वाली मैदान में पहुंचे।

अलग-अलग रंगों के पारंपरिक वस्त्र और पगड़ी पहने बग्वालियों के हाथों में बांस और रिंगाल से बनी ढालें थीं। शंखनाद और मां वाराही के जयकारों के बीच बग्वाल शुरू हुई।

इस बार बग्वाल में पत्थरों के स्थान पर फल और फूलों का प्रयोग किया गया। फल-फूलों की बरसात के बीच बग्वालियों ने परंपरा का निर्वहन किया। पीठाचार्य पंडित कीर्तिबल्लभ जोशी के अनुसार फल-फूलों से खेली जाने वाली बग्वाल को शुभ और फलदायी माना जाता है।

मुख्यमंत्री धामी ने बग्वाल का अवलोकन करते हुए कहा कि देवीधुरा की यह परंपरा पूरे देश में अनूठी है। उन्होंने कहा कि बग्वाल केवल एक ऐतिहासिक परंपरा नहीं, बल्कि अनुशासन, भाईचारे और सामुदायिक एकता की मिसाल भी है। बग्वाल के बाद सभी योद्धाओं का एक-दूसरे से गले मिलना इस परंपरा की विशेषता है।

महिलाओं ने मुख्यमंत्री को बांधी राखी

रक्षाबंधन के अवसर पर मेले में बच्चियों और महिलाओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को राखी बांधी। मुख्यमंत्री ने सभी को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद अजय टम्टा, जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद सिंह अधिकारी, मंदिर समिति अध्यक्ष हीराबल्लभ जोशी, भाजपा जिलाध्यक्ष गोविन्द सामन्त सहित प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, मंदिर समिति के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।